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प्रसन्न आईना अंधाधुंध लड़ाई झगड़ा पागलपन है वक्त फिर बदलेगा जिंदगी के खेल एकता जब से भाग्यबनानाआसाननहींहै।हरकिसीकेबसकायहकामनहींहै। आँखें सरेआम कीर्ति नारी शिक्षा पापा जी पान खाती थी बिन बुलाया मेहमान जन्मदिन स्वयंसेसवांदआवश्यक पढ़ाई नहीं की 1932021 928 am मैं रूसवा

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